Sunday, 10 August 2014

सारी आदते बुरी नहीं होती!

आदतें अमूमन गलत ही लगती है, और अगर वो व्यसन हो, तो और भी बुरी, मगर सारी आदतें बुरी हो ऐसा ज़रूरी नहीं. अब इसको ही देख लीजिए! कुछ दिनों पहले या यूँ कहूँ की १ महीना पहले मैंने बच्चन सर के ब्लॉग पर कमेंट करना शुरू किया. इस उम्मीद से की मैं इस आदत को बरकरार रख पाऊँगा, और हुआ भी कुछ ऐसा ही, अब करीब १ महीना होने को आ गया है और मैं लगातार प्रतिदिन उनके ब्लॉग पर कमेंट करता हूँ.

वैसे सिर्फ यही एक आदत नहीं है, एक और आदत जो की १६ जुलाई से मुझे लगी है और आजतक बरकरार है, वो है नियमित रूप से ब्लॉग लिखने की आदत. वो दिन है और आज का दिन है, मैं कुछ भी करके ब्लॉग ज़रूर लिखता हूँ, चाहे मुझे उसके लिए कुछ भी करना पड़े. स्मार्टफोन साथ नहीं है तो क्या हुआ, कंप्यूटर तो है, और फिर अपनी भावनाओ को लिखने से बेहतर क्या हो सकता है. मैं चाहे एक लाइन का ब्लॉग लिखूं या एक पन्ने के बराबर, कुछ भी हो जाए ब्लॉग लिखना नहीं रुकना चाहिए. खुश हूँ की इस आदत को बरकरार रख पा रहा हूँ.

वैसे सिर्फ ये दो ही नहीं, एक और आदत ने मुझे आजकल अपना साथी बनाया हुआ है और वो है, नियमित रूप से घर का खाना बनाने की आदत. खैर अभी इस आदत को शुरू हुए ज़्यादा दिन नहीं हुए है तो अभी मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहूँगा, मगर ये कह सकता हूँ की इस आदत से सेहत और बजट पर बहुत ही अच्छा असर होता हुआ देख रहा हूँ.

बाहर का खाना खाने की आदत बंद करके बहुत ही अच्छा लग रहा है. अच्छी बात ये है की बाहर की हर इक चीज़ बंद है, जैसे की नमकीन, बिस्कुट, चिप्स इत्यादि. ज़बान पर इतनी जल्दी कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल लगता है, मगर मैं खुश हूँ की मैं ऐसा कर पाया. हालांकि अभी मैं शुरूआती स्टेज में हूँ, इसलिए इसकी बढ़ा चढ़ा कर बात नहीं करना चाहूँगा, मगर इस बीच एक दिन एक साथी के अनुरोध पर जब बाहर की दो चीज़ें खायी तो ये पता चला की घर के खाने से शरीर पर कितना अच्छा प्रभाव पड़ा है.

उम्मीद करता हूँ की मैं इन आदतों को बहुत आगे तक लेकर जा सकूंगा.

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