Tuesday, 19 August 2014

कुंठित होना गलत है, पर क्या करें?

ये बात तो सच है की कुंठित होना एक गलत बात है, और इस पीड़ा में होने वाला इंसान किस से,क्या कहे और कैसे इसका निर्धारण करने में बहुत समय लग जाता है. कुंठा वैसे तो मन का एक ऐसा आईना है जो आपको शायद ये बताता है की आप गलत राह पर है, क्यूंकि कुंठा से हासिल कुछ नहीं होता, सिर्फ नुक्सान होता है, मगर ये एक ऐसी क्रिया है जिसके दुष्परिणामों के बारे में सब जानते है, पर मानता कोई नहीं, और हम सब इसी कुंठा में जीवन जीते है.

कई लोग ये सोच रहे होंगे की वैसे आज इस ब्लॉग की ज़रुरत क्यूँ आन पड़ी? बात लाज़मी भी है, मगर अगर आप मेरा कल का ब्लॉग देखे तो ये ब्लॉग उस ब्लॉग को विस्तार से बयान करने का प्रयास है. अगर देखा जाए तो लोग कहेंगे की आप अपने घाव को नासूर बना रहे है, मगर सच ये भी है साहब की शायद ब्लॉग लिखकर मैं उस घाव को नासूर बनने से रोकने का प्रयास कर रहा हूँ,क्यूंकि कहते है की कुंठा को अपने अंदर रखने से वो ह्रदय की पीड़ा बन जाती है जो बाद में घृणा का रिसाव करते हुए पूरे दिल दिमाग पर अपना ज़हर फैला देती है साहब, जो की बहुत तकलीफदेह है, और उस पीड़ा के सामने ये तो लेश मात्र है.

खैर तो मैं सीधे मुद्दे पर आता हूँ. अगर आपने मेरा कल का ब्लॉग पढ़ा हो तो आपको ये पता होगा की मैं इस बात से थोड़ा सा दुखी था की नौकरी करने के कारण मैं थिएटर को उतना समय नहीं दे पा रहा, जितना देना चाहिए, और इस कारण मेरे सहरंगकर्मी मुझसे आगे निकल गए, और मैं पीछे रह गया. आज वो मंच पर एक स्थापित किरदार कर रहे है, और मैं कुछ भी नहीं. ये कितना दुखद और आत्मविश्वास को तोड़ने वाला है, इसके बारे में कुछ कहना भी असंभव है, क्यूंकि ना आपने मेहनत में कोई कमी रक्खी, ना लगन में, मगर आजतक मंच तो छोड़िए, नुक्कड़ में भी आपको एक वाक्यांश नहीं मिला. शायद इसका कारण ये की जिसके हाथों में कमान थी उसको लगा की मैं इस काबिल नहीं हूँ, वैसे ये दुखद है की तीर छोड़े बिना ही ये कह देना की धनुष खराब है.

आशा करता हूँ, की इस कुंठा द्वारा मुझे जकड़ने से पहले ही इसका निदान प्राप्त हो सके.

4 comments:

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    1. देखिए साहब, आप जो भी है, इतना तो स्पष्ट है की आप मुखौटे के साथ बात करना पसंद करते है, वास्तविकता में नहीं. देखिए ना, आपने एक नकली प्रोफाइल बनायीं मेरे ब्लॉग पर कमेंट करने के लिए,ये आपकी मानसिकता को दर्शाने के लिए काफी है. वैसे जहाँ तक रही ये बात की मेरे लिए प्राथमिकता क्या है? इसको आप नहीं तय कर सकते. मेरी प्राथमिकता सदा ही थिएटर और अभिनय रहा है, जहाँ तक बात है किसी का ऑटोग्राफ लेना तो मैं हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे के साथ ना तो फोटो खिचवाता हूँ, ना ही उनका ऑटोग्राफ लेता हूँ. मैं सदा से एक का ही फैन रहा हूँ, और वैसे भी इस प्रकार का कमेंट करके आपने अपनी छोटी सोच का बहुत ही अच्छा उदहारण दिया है और हाँ मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा, क्षमा मांगते हुए की अगर कमेंट करना ही है, तो आमने सामने बात करो, करा दूंगा याद आपको सब कुछ.

      वैसे मुझे अंदाज़ा है की आप कौन साहब है और ये किसका मुखौटा है, मगर ये बेहद ही घटिया तरीका है. अगर मेरा नंबर है, तो कॉल करने का भी माद्दा रखो.

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    3. yadi itna hi hai, to phone karlo, kuch ghat nahi jayega. Maine to nahi kaha ki main baat karne ko bhi taiyaar nahi hoon. Waise bhi, jo kuch mujhe kehna tha, maine spasth kaha, koi 'anonymous' bankar nahi. Himmat itni to dikhao, ki jo kehne ki iccha hai usko asliyat mein bata sako, yun anonymous bankar to tum ye saabit kar rahe ho ki 'Reedh ki haddi' kahin na kahin missing hai

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