Monday, 18 August 2014

दुखी हूँ

क्यों? और किस कारण, ये न बताने की इच्छा है, और न ही मैं ऐसा किसी की संवेदना को पाने के लिए कह रहा हूँ, मगर क्या दुखी नहीं हूँ? ऐसा नहीं है, दुखी हूँ, इसलिए नहीं की कोई आगे बढ़ गया और मैं पीछे रह गया.

यदि लगन या कोशिश में कमी होती तो शायद मैं इसको मान भी लेता मगर ऐसा नहीं है,मैं जानता हूँ की मैंने अपना सब कुछ इस सपने के लिए न्योछावर कर दिया, मगर आज जब तिरस्कृत सा महसूस करता हूँ तो दुःख होता है. लोग सारी सुविधाओं को पाने के काबिल है, और मैं नहीं, ऐसा क्यों? क्या मैंने मेहनत नहीं की, या मुझमें वो हुनर नहीं, वास्तव में ये बात नहीं, बात दरअसल ये है की जहाँ और लोगों ने चीज़ों के लिए हाय तौबा मचाई, मैंने नहीं करी, और शायद यही मेरी गलती थी. शायद इसी लिए मुझे नाकारा समझा गया, और कोई भी मौका नहीं मिला.

मैं नौकरी के साथ अपने उस सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहा हूँ, तो क्या कोई गुनाह कर रहा हूँ? क्या करूँ साहब, मेरे पास वो साधन नहीं, जिनसे की मैं पैसे की फैक्ट्री लगा सकूँ और इस सपने को पूरा कर सकूँ, और शायद यहीं कारण है, की मुझे न तो वो सम्मान न वो मान, या इस काबिल ही समझा जाता है.

जिन्हे नाज़ है उनपर जो समय दे पाते है और उनपर दुत्कार जो अपनी सारी चीज़ो को मैनेज करते हुए अपना सपना पूरा करने की कोशिश कर रहे है, वो कहा है?

No comments:

Post a Comment