Thursday, 7 August 2014

ये पल है निर्धारित करता!

सही मायनो में हम सब ये सोचते है की जब वो वक़्त आएगा तब मैं ये कर लूँगा. वास्तव में ऐसा नहीं है! जो भी है बस यही इक पल है. अरे वाह, मुझे वो गीत याद आ गया:

'आगे भी जाने न तू, पीछे भी जाने न तू, जो भी है, बस यही इक पल है'


कितनी गहरी बात कह गया ये गीत, वैसे ये गीत भी एक ऐसी फिल्म का है, जो मेरे अज़ीज़ है, 'वक़्त'. इस फिल्म का हर गीत बहुत ही अच्छा था, और हर गीत में एक सन्देश. यकीन मानिए, कल के बारे में सोचने का वक़्त ज़िन्दगी में नहीं है, क्यूंकि आप इस पल क्या करते है, वो आपका कल निर्धारित करता है. उम्मीद है की इस छोटे से ब्लॉग को पढ़कर ये समझने की कोशिश करेंगे की कल की होने वाली या ना होने वाली घटनाओ के बारे में सोचकर वक़्त बर्बाद करने से कोई लाभ नहीं होता. ज़रुरत है इस वक़्त को जीने में और कुछ करने में. इसी फिल्म के इस गीत के साथ छोड़े जाता हूँ जो की आपको एक सन्देश देता है.

वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज, वक़्त की हर शह गुलाम, वक़्त का हर शह पे राज

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