Thursday, 14 May 2015

और नौकरी चली गई

जी हाँ, ये सच है, एक हफ्ते की नौकरी के बाद, आज बड़ी ही बेढ़ंगी तरीके से नौकरी चली गई. ऐसा लगा जैसे कोई आँधी आई और मुझे उड़ा के ले गई. ऑफिस के बड़े लोगों ने निर्णय किआ और मुझे बता दिया।

चलिए अब फिर से नई नौकरी की तलाश चालू।

Friday, 8 May 2015

अक्सर देर कर देता हूँ मैं

http://www.nishantyadav.in/2015/05/blog-post_8.html

मैं अक्सर देर से पहुँचता हूँ ।
उसके बुलाने पर या खुद ही जाने पर ।।
मै अक्सर देर से कहता हूँ ।
उससे कुछ कहना हो या फिर खुद से ।।
मैं अक्सर देर से समझ पाता हूँ ।
समझना उसको हो या खुद को ।।
मैं बहुत देर कर देता हूँ ।
पहले हाँ कहने  में फिर ना कहने में ।।
मैं अक्सर देर से पढता हूँ ।
किसी का चेहरा हो या जज्वात अपने ।।
मै अक्सर देर से जलाता हूँ चिराग ।
अँधेरा रात के होने का हो या मन का ।।
मै अक्सर देर संभल पाता हूँ ।
हाथ तुम्हारा हो या साथ खुद का ।।
...निशान्त यादव